इतिहास साक्षी है, साहस और बल में भारत की वीरांगनाएं किसी से कम नहीं : ममता यादव

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59वें अधिवेशन पर निकली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की शोभा यात्रा
झांसी। छात्र शक्ति की जब भी बात होती है तो इमसें छात्राएं सम्मिलित होती हैं पर अक्सर हम ऐसा मानकर चलतें हैं कि जन-जन जागरण का कार्य पुरूष तक ही सीमित है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् में छात्राओं को दायित्वों के साथ जिम्मेदारी दी जाती है जिससे वह घर, परिवार, समाज एवं राष्ट्र में अपनी जिम्मेदारी निभा सके, उक्त विचार अ.भा.वि.प. की राष्ट्रीय छात्रा प्रमुख ममता यादव ने अ.भा.वि.प. के 59वें अधिवेशन में व्यक्त किये। उन्होंने स्त्री विमर्श और युवा विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा भारत भूमि ऐसी वीरांगनाओं के इतिहास से भरी पड़ी है जब स्त्री शक्ति ने बताया है कि साहस और बल में वे किसी से कम नहीं है। उन्होंने स्त्रीवाद की कई पश्चिमी अवधारणाओं के बारे में बताते हुए कहा कि पश्चिम में पुरूष के समक्ष स्त्री को खड़ा करना ही नवआंदोलन था। जबकि हमारी सनातन धारणा में स्त्री के बिना पुरूष का अस्तित्व ही अधूरा है। स्त्री पुरूष को पूर्णत्व प्रदान करती है। उन्होनें स्वामी विवेकानंद द्वारा व्यक्त विचार, ‘हमारी संस्कृति का शाश्वत नियम है कि स्त्री और पुरूष परस्पर परावलंबी हंै। प्रथम सत्र में रमेश गड़िया ने विद्यार्थी परिष्द की कार्यविधि की चर्चा करते हुए कहा कि संगठन निश्चित विचार, उदेश्य और सिद्वांतों को लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विवेकानन्द जी ने कहा था अगर एक व्यक्ति भी निजी जीवन में इसका पालन करें तो सफलता को प्राप्त कर सकता है। बिना विचार और उदेश्य के मानव जीवन शून्य है। भारत को वैभवशाली, शाक्तिशाली और महान बनाने के लिये दृढ़संकल्प होकर सामुहिक प्रयास करने की जरूरत है। हम जिस सनातन संस्कृति को मानते हैं उसी रास्ते और विचार पर चल कर ही अपने उदेष्यों को पूरा कर सकते हैं। संगठन की कार्यपद्धति के अंतर्गत समाज की सबसे छोटी इकाई से षुरूआत करने की जरूरत है और सबसे छोटी इकाई है व्यक्ति। व्यक्ति में संस्कार, सकरात्मक सोच, प्रमाणिकता एवं उर्जावान जैसे तत्वांे का विकास करना होगा। तभी समाज और देष का निर्माण होगा। आज देष में बढ़ रही समस्याओं के लिये लाखों छात्र कार्यकर्ताओं की आवष्यकता है। एक बेहतर कार्यकर्ता को तैयार करने के लिये हमें ऐसे लोगों के जीवन से सीखना चाहिये जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता अर्जित की है। छात्रों को संगठन से जोड़ने के लिये विद्यार्थी परिशद् का मंत्र है, जैसा है वैसा लेंगंे और जैसे चाहेंगें वैसा बनायेंगें। हर कार्यकर्ता के पास काम होना चाहिये और हर काम के लिये कार्यकर्ता होना चाहिये। ऐसी हमारी कार्यपद्धति है। हम जब एक साथ आयेंगें, एक जैसा सोचेंगे और एक जैसा कार्य करेंगें तभी हममंे सामुदायिक का भाव आयेगा। इसी सामुदायिकता से समता, एकात्मता और समरसता आयेगी।
इसके साथ ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिशद् के 16 जिलों से आये लगभग 1200 कार्यकर्ताओं ने रानीलक्ष्मीबाई पैरामेडिकल प्रांगण में रैली निकाली। ज्ञान षील एकता, परिशद् की विषेशता, झांसी हो या गुहाटी अपना देष अपनी माटी, फूल नहीं ये नारी है ये भारत की चिंगारी ह,ै आदि नारों के साथ रैली निकाली।
इस अवसर पर एबीवीपी की विश्वविद्यालय प्रमुख श्रीहरि बोरिकर, निवर्तमान प्रदेश मंत्री प्रवीण लखेरा, प्रदेष संगठन मंत्री कमलनयन, पूर्व प्रांत अध्यक्ष वरूण सिंह, प्रांत छात्रा प्रमुख अंजु गुप्ता, विभाग संगठन मंत्री अजय कुमार यादव, प्रांत उपाध्यक्ष महेन्द्र सिंह, महानगर उपाध्यक्ष मानवेंद्र सेंगर, महानगर मंत्री सौरभ बग्गम, व्यवस्था प्रमुख प्रसन्न जैन, सह व्यवस्था प्रमुख मनेन्द्र सिंह, सुधीर कुमार, वेद श्रीवास्तव, अमित चिरवरिया, अजय कुमार तिवारी, अजय उत्तम पटेल, दिनेश कुमार, प्रियांषु पटैरिया, विकास नायक, सक्षम नायक, यष राज, वेद श्रीवास्तव, पंकज षर्मा, संस्कृति गिरवासिया, आदि उपस्थि रहे।

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