घोटालेबाजी पड़ी मंहगी, देना बैंक मैनेजर समेत चार को कोर्ट ने सुनाई 4-4 साल की सजा

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भोपाल। लालच और धोखाधड़ी के परिणाम हमेशा बुरा ही होता है, हां ये बात जरूर है इसका परिणाम आने में भले ही कुछ देर भले ही लग जाए परन्तु इसकी सजा जरूर मिलती है। यह बात शायद देना बैंक के मैनेजर और उनके साथी भूल गए थे और बैंक के साथ धोखेबाजी करते हुए घोटाला कर कर लेकिन अब उसकी सजा उन सभी घोटालेबाजों को मिल गई है। मामला साल 2002-03 का है जिसमें लम्बे समय पर दोषियों को सजा सुनाई गई।
राजधानी में शनिवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने 16 करोड़ 57 लाख रुपए के बैंक गारंटी घोटाले मामले के आरोपी बैंक मैनेजर, बैंक अधिकारी और अनाज की खरीददार फर्मों के संचालकों को 4 साल की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश आलोक अवस्थी ने सुनाया।
अभियोजन के मुताबिक, घटना 2002 से 2003 के बीच एमपी नगर स्थित देना बैंक की शाखा में हुई थी। बैंक के रीजनल मैनेजर एस श्रीनिवासन ने सीबीआई कार्यालय में लिखित शिकायत की थी कि बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर आरके माथुर, बैंक अधिकारी संजय कुमार ने आरके एक्सपोर्ट भोपाल संचालक हेनरी गर्ग, गारंटर आरके गर्ग और सिंघल एक्सपोर्ट मुंबई के पार्टनर अशोक अग्रवाल के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रूपए की बैंक गारंटी हासिल की है। बैंक मैनेजर और बैंक अधिकारी ने बैंक के नियमों को ताक मेें रखते हुए ऐसी कुल 18 बैंक गारंटी स्वीकृत की, जो कि 16.57 करोड़ रुपए की है।
एफसीआई चंडीगढ़ से खरीदा चावल
आरोपियों ने फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर चंडीगढ़ फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया से चावल की खरीद की है। बैंक अधिकारियों ने आरोपितों को लाभ पहुंचाने के लिए उनकी लिमिट से अधिक की बैंक गारंटी स्वीकृत की थी। आरोपियों को जहां 2 करोड़ 10 लाख रुपए तक बैंक गारंटी की पात्रता थी, लेकिन उन्हें 16 करोड़ 57 लाख रुपए की बैंक गारंटी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दे दी गई। आरोपियों ने फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर फिरोजपुर, जालंधर, चंडीगढ़, पटियाला व अन्य राज्यों के एफसीआई से करोड़ों के अनाज की खरीदी की।
एफसीआई से की गई खरीदी के मामले में अलग केस
आरोपियों ने एफसीआई को भी भुगतान करने के संबंध में लाखों रुपयों का चूना लगाया था। वसूली के इन प्रकरणों की सुनवाई दूसरी अदालतों में चल रही है। सीबीआई ने शिकायत के आधार पर षडयंत्र में शामिल बैंक अधिकारियों और फर्मों के संचालकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जीवाड़े और षडयंत्र का अपराध कायम कर मामले का चालान अदालत में पेश किया था।

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