कानून व समाज साथ मिलकर काम करे तो बाल यौन शोषण को रोकना संभव : सुभाष सिंह

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झाँसी। परमार्थ समाज सेवी संस्थान के तत्वाधान में चाइल्डलाईन झांसी द्वारा ‘‘बाल यौन शोषण रोकने में समाज एवं कानून की भूमिका’’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन राजकीय संग्रहालय सभागार मेें किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झांसी मण्डल के पुलिस उप महानिरीक्षक सुभाष सिंह बघेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यकाल के दौरान अपराधों की श्रेणी एवं कारणों पर गहन अध्ययन किया है, विश्लेषण किया तो यह पाया कि पूर्व में आपराधिक मामले सिर्फ हत्या, चोरी, धोखाधड़ी एवं छेड़खानी के दर्ज होते थे, परन्तु वर्तमान में नाबालिगों के साथ शारीरिक एवं यौनिक हिंसा के आपराधिक मामले बढ़े हैं। उन्होनंे कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम बच्चों के प्रति घटित हो रहे यौन अपराधों के कारणों की खोज करें।
बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी हों जागरुक: डीआईजी
मुख्य अतिथि ने कहा कि एक तरफ देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है वहीं दूसरी तरफ समाज दूषित एवं नैतिक रुप से पतित हो रहा है। महिलाओं और पुरुषों में असमानता की गहरी खाई है। बच्चियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर उन्हें कमजोर किए जाने की कोशिश की जाती है। लेकिन पिछले दो दशकों में भारत में बालिकाओं ने प्रगति के नए स्तम्भ स्थापित किए हैं। समाज, कानून और सामाजिक संस्थाओं को एकजुट होकर समाज में फैली बुराईयों को दूर करने की आज आवश्यकता है, ताकि हमारे देश का भविष्य सुरक्षित हो सके। उन्होंनें कहा कि आज नाबालिग बच्चों के संरक्षण हेतु पाॅक्सो एवं जे0जे0 एक्ट जैसे कानून के माध्यम से संरक्षण प्रदान किया जा रहा है, आवश्यकता है कि बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी जागरुक हों। समाज में अच्छे लोगों को आगे आकर बुराईयों को नष्ट करना होगा। साथ ही अपराध को कभी सहन नहीं करना चाहिए, बल्कि डट कर सामना करना चाहिए।
युवाओं की जागृति से देश बनेगा विकसित: डाॅ. ममता जैन
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए बाल कल्याण समिति की सदस्या डाॅ0 ममता जैन ने कहा कि आज समाज में विकृतियां बढ़ रही हैं, परिवार टूट रहे हैं, जिसके कारण बच्चों को सही दिशा व मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हो पा रहा है। जागरुकता के अभाव में, वे या तो अपराधियों के शिकार हो जाते हैं या अपराध में लिप्त हो जाते हैं। भारत एक युवा राष्ट्र है, युवाओं में जागृति लाकर ही देश को विकसित बनाया जा सकता है।
परस्पर स्नेह एवं जागरुकता से रूकेंगी कुरीतियां: संजय सिंह
जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक एवं परमार्थ समाज सेवी संस्थान के सचिव संजय सिंह ने कहा कि कल तक देश में महिलायें असुरक्षित थीं, आज बच्चे भी सुरक्षित नहीं है। समाज में संवेदना एवं अनुशासन की कमी आ आती जा रही है। भौतिकवाद की इस अंधाधुंध दौड़ में, हम अपनी युवा पीढ़ी को नैतिक शिक्षा, संस्कारों एवं आदर्शों से दूर करते जा रहे हैं। उन्होनें कहा कि एक ओर जहाँ पूजीवाद बढ़ा है वहीं दूसरी ओर बच्चे असुरक्षित हुए हैं। संवेदना, परस्पर स्नेह एवं जागरुकता के माध्यम से इस कुरीति को रोका जा सकता है, जिसका उत्तरदायित्व सरकार एवं समाज को मिलकर लेना होगा, जिसमें नागरिक समाज को भी अपने उत्तरदायित्वों को निभाना होगा।
अभिभावक बच्चों के साथ करें सही-गलत की चर्चा : डाॅ. पैन्युली
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के उपाचार्य डाॅ. सी.पी. पैन्युली ने अपने सम्बोधन में कहा कि बाल यौन हिंसा साठ के दशक तक चर्चा में नहीं था, तत्कालीन समय में इंग्लैण्ड एवं अमेरिका में बच्चों के साथ यौनिक हिंसा के कुछ हादसे प्रकाश में आए थे, लेकिन आज भारतीय समाज में यह महामारी की तरह फैल गया है। समाज ने अपनी सामाजिकता को खत्म कर दिया है। परिवार व समाज विघटित हो रहे हैं। बच्चों में नैतिक शिक्षा, इतिहास का ज्ञान एवं अनुशासन की प्रवृत्ति सिर्फ समाज की बैठकों से बढ़ती है। अभिभावकों को अपने बच्चों को समय देकर उनसे सही गलत पर चर्चा करनी चाहिए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सी. बी. सिंह ने कहा कि हमारा आचरण ही बच्चों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनता है। अभिभावकों को चाहिए कि नैतिक शिक्षा व मानवीय मूल्यों आधारित परिवेश बनाकर हमें बच्चों को बेहतर इंसान बना सकते हैं।
बाल यौन हिंसा समाज में फैली एक गम्भीर बुराई : श्रीमती किरन
झाँसी नगर निगम की पूर्व महापौर किरन राजू बुकसेलर ने कहा कि बाल यौन हिंसा समाज में फैली एक गम्भीर बुराई है, जिसके निदान हेतु हमें समस्या की तह तक जाना होगा। उन्होनें कहा कि हम भावी पीढी को संस्कार देकर मानवीय समाज का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंनें कहा कि अभिभावकों का यह दायित्व है कि भौतिक सुविधाओं के नाम पर वे अपने बच्चों को दिशाविहीन तो नहीं कर रहे हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा, अनुशासन, संस्कार, नैतिक शिक्षा का विस्तार करना होगा।
जीआरपी झाँसी के थानाध्यक्ष ए. के. सिंह ने कहा कि समाज और कानून एक ही श्रृंखला की दो कड़ियाँ हैं। इसी समाज से कानून निकला है। कानून से ज्यादा जरुरी है कि समाज जागरुक हो, बच्चों को जागरुक करे, संस्कारित करे। बच्चों को आवश्यकता है कि घर से बाहर जाते समय मर्यादित व्यवहार करें एवं शालीनता से रहें। शालीनतापूर्ण एवं मर्यादित व्यवहार हमारी स्वतन्त्रता में बाधा उत्पन्न नहीं करता। यदि बच्चों का संस्कार श्रेष्ठ होगा तो शिक्षा परिमार्जित हो जाएगी, साथ ही गलत बात का विरोध अवश्य करें। अभिभावक का दायित्व है कि बच्चों की दिनचर्या पर अवश्य ध्यान दें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ एस0के0राय ने कहा कि विधि समाज का एक दर्पण है। हाल ही में कई घृणित घटनाएं प्रकाश में आयी है, समाज सड़कों पर उतरा है, न्यायपालिका को नए कानून को अमल में लाना पड़ा, पाॅक्सो एक्ट में भी संशोधन हुए। हमें समाज से ऐसी कुरीतियों को दूर करने के लिए स्वच्छ समाज का पुर्ननिर्माण करना होगा।
संगोष्ठी के दौरान इप्टा झाँसी के रंगकर्मियों रोहित प्रजापति, रंजीत सिंह, दिव्या कुमारी, शिखा सक्सेना, प्रतीक द्विवेदी, शिवानी पोरवाल, शिवानी यादव, सुन्दरम्् यादव, आशुतोष द्विवेदी, सौरभ आजाद, ऋषि कुमार, राघवेन्द्र सिंह, कोमल, ऋषिका बुन्देला, आदि द्वारा रतन दीवान व मयंक द्वारा निर्देशित बालिकाओं पर हो रही यौनिक हिंसाओं पर आधारित नाट्य प्रस्तुति की गयी, जिसको देखकर सभागार में उपस्थित दर्शकों व मंचासीन अतिथियों की आंखें नम हो गईं। दर्शकों द्वारा नाट्य प्रस्तुति को मुक्त कंठ से सराहा गया।
कार्यक्रम का संचालन डाॅ. मुहम्मद नईम ने व आभार परमार्थ के सचिव संजय सिंह ने व्यक्त किया। इस अवसर पर बाल कल्याण समिति के सदस्य आबिद खान, साहित्यकार डाॅ. कुन्ती हरिराम, मनीष कुमार, बाल संरक्षण अधिकारी अभिषेक मिश्रा, डाॅ. श्वेता पाण्डेय, नेहा मिश्रा, संध्या सिंह, एस. आई. राजकुमारी गुर्जर, प्रधानाचार्य संतोष द्विवेदी, अमरदीप, जितेन्द्र कुमार, हिमांशु विमल, सोनिया पस्तोर, सत्यम् सहित विभिन्न महाविद्यालयों व विश्वविद्यालय के छात्रध्छात्रायें व नगर के सम्भ्रान्त नागरिक उपस्थित थे।

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